Sunday, May 6, 2018
धूप से झुलसे चेहरे का उपचार
गर्मियों में एक समस्या जिसका सामना हर किसी को करना पड़ता है वह धूप से झुलसे चेहरे। इसका असर हमारे स्किन पर साफ तौर पर दिखाई देता है। अगर आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो नीचे दिए गए कुछ उपचारों पर आपको ध्यान देना होगा।
बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-सेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह स्वाभाविक रूप से क्षारीय होता है, इसलिए अम्ल सम्बंधित रोगों के लिए इसका इस्तेमाल बहुत ही व्यापक रूप से किया जाता है। धूप से झुलसे चेहरे का उपचार के लिए आप बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कर सकते हैं। सनबर्न के लिए एकदम सही घरेलू उपचार है।
इसके लिए आप एक कप बेकिंग सोडा में एक चौथाई कप पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह से मिक्स और 20 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद आप नहा लीजिए और टावल से अपने शरीर को पोछ लीजिए। फिर इस पेस्ट को स्किन के प्रभावित क्षेत्र में लगाएं। फिर इसे 10 मिनट के लिए छोड़ दें और ठंड़े पानी से धो लीजिए।
सेब का सिरका
खाने के स्वाद को बढ़ाने वाला सेब के सिरके का इस्तेमाल कई घरों में किया जाता है। सेब के सिरके में कई गुण होते हैं, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी होता है। उन्हीं गुणों में एक गुण है सनबर्न का उपचार। सिरका, विशेष रूप से सेब साइडर सिरका, त्वचा के पीएच स्तर को सामान्य करने और उपचार की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए जाना जाता है।
इसके लिए आप स्प्रे बोतल में सेब के सिरके को भर लीजिए और उसे स्किन प्रभावित क्षेत्र में लगाएं। आपको बहुत ही फायदा मिलेगा। अगर आपकी त्वचा सेंसिटिव है तो आप इसमें पानी भी मिला सकते हैं।
खीरा
स्वास्थ्यवर्द्धक और सौन्दर्यवर्द्धक गुणों से भरपूर खीरा एक ऐसा खाद्द पदार्थ है जिसका उत्पादन लगभग पूरे भारत में किया जाता है। खीरा शरीर को शीतलता और ताजगी प्रदान करता है। इसको आप कई तरह से खा सकते हैं, जैसे- सलाद, सैंडवीच, या यूं ही नमक छिड़क कर भी खा सकते हैं।
आपने तो अपनी आंखों पर खीरा लगाने की लोकप्रिय प्रथा को भी देखा होगा। अगर इसके सौन्दर्य लाभ की बात करे तो यह सनबर्न हटाने के उपाय के तौर पर काम करता है। इसके लिए आप एक खीरे को अच्छी तरह मैशड कर लीजिए और इसके मास्क को स्किन के प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं। इसे धोने से पहले 20 मिनट के लिए छोड़ दीजिए। आपको असर साफ तौर पर दिखाई देगा। आप इसे दिन में कई बार लगा सकते हैं।
एलोवेरा
आयुर्वेद में एलोवेरा को संजीवनी कहा गया है। यह त्वेचा की देखभाल में बहुत ही सहायता करता है। यह धूप की कालिमा घरेलू उपचार है। इसके अलावा यह व्यापक रूप से सनबर्न को दूर करने और घावों को ठीक करने के लिए जाना जाता है। जेल आमतौर पर कच्चे रूप में और सीधे प्रभावित त्वचा पर लगाया जाता है।
इसके लिए आप एलोवेरा के पत्तों से फ्रेश एलोवेरा जेल निकाल लें और उसे आधे घंटे के लिए फ्रीज में रख दें। फिर प्रभावित स्किन इसे लगाएं और एक घंटे बाद इसे ठंड़े पानी से धो लीजिए।
वजन बढ़ाने का आयुर्वेदिक तरीका
डाइट में सोयाबीन को करें शामिल
अपनी डाइट में आप सोयाबीन को शामिल कीजिए। यदि आप एक शाकाहारी प्रोटीन के अच्छे स्रोतों की तलाश में हैं तो सोया सही है। सोया प्रोटीन में उच्च है। प्रोटीन से भरपूर होने के कारण यह हमारे आहार का अहम हिस्सा बन चुका है। वैसे सोयाबीन को हम सभी अलग-अलग रूप में अपनी डाइट में शामिल करते हैं। किसी को यह सब्जी की तरह पसंद है, तो कोई इसे दूध की तरह अपनी डाइट में शामिल करता है।फलों का सेवन
वजन बढ़ाने का आयुर्वेदिक तरीका में फलों का सेवन भी शामिल है। आप नियमित रूप से फलों और फलों के जूस का सेवन कीजिए। यदि संभव हो तो हर दिन या सप्ताह में कम से कम तीन बार फलों का सेवन कीजिए। फाइबर में समृद्ध फल पाचन तंत्र के कामकाज में सुधार करने में भी मदद करता हैं।
अपने वजन को बढ़ाएं
अगर आप वजन बढ़ाना चाहते हैं तो अपनी डाइट में दही, घी, दूध, गन्ना, चावल, काला चना और गेहूं शामिल करें। स्वस्थ तरीके से वजन हासिल करने के लिए ये सबसे अच्छा तरीका है।वजन बढ़ाने के लिए नियमित रूप से करें व्यायाम
एक्सरसाइज करने से हमें सारा दिन ताजगी महसूस रहती है और हमारी हड्डियों को मजबूत बनाया जा सकता है। यदि हम रोज सुबह व्यायाम करना शुरू कर दें, तो हमें इसकी अदात पड दाती है, जिससे किसी तरह की व्यायाम करने में दिक्कत नहीं होती।
वजन प्राप्त करने का मतलब यह नहीं है कि आपको व्यायाम करने की ज़रूरत नहीं है। हेल्दी तरीके से वजन को बढ़ाने के लिए आपको नियमित रूप से व्यायाम करने की जरूरत है। व्यायाम करने से बॉडी फूड को मेटाबॉलाइज कर पाएगा। साथ ही आपको भूख भी लगेगी जिससे आपका वजन बढ़ सकता है।
अपने आहार में मसाले को करें शामिल
आप अपने आहार में दालचीनी, लहसुन, अदरक, इलायची, लौंग और काली मिर्च जैसे मसालों को शामिल कीजिए। ये आपकी भूख को उत्तेजित करने में मदद करती है।हल्दी दूध भी है फायदेमंद
आयुर्वेद में नींद का महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए यदि आप अपने वजन को बढ़ाना चाहते हैं, तो रात में अच्छी तरह से सोएं। आप सात से आठ घंटे की नींद लीजिए। बिस्तर पर जाने से पहले मोबाइल फोन या लैपटॉप से दूरी बनाकर रखिए। आप अच्छी नींद के लिए एक चुटकी हल्दी के साथ गाय का दूध पीजिए। इसका प्रयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है, हल्दीे दूध कई रोगों के साथ दर्द से तुरंत आराम देता है।सामान्य गति से आहार का सेवन
ज्यादातर लोग आहार का सेवन तेज या स्लो गति से करते हैं। अगर आप सामान्य गति से आहार का सेवन करते हैं, तो इससे वजन बढ़ाने में सहायता मिलती है। एक सामान्य गति से भोजन करने से लार ग्रंथियों का निर्माण होता है, जो पाचन में सहायता करता है।घमौरियों से छुटकारा पाने के आयुर्वेदिक उपाय
घमौरियों से छुटकारा पाने के आयुर्वेदिक उपाय
गर्मियों में घमौरियों की समस्या आप है। इससे वह लोग ज्यादा परेशान होते हैं जिन्हें पसीने आते हैं। घमौरियों की वजह से हमें जलन और खुजली भी बहुत होती है जिससे हम दिन हो या रात हमेशा परेशान रहते हैं। आज हम घमौरियों से छुटकारा पाने के आयुर्वेदिक उपाय के बारे में बात करेंगे जो आपकी तकलीफ से छुटकारा दिलाने में सहायता करेगा।
घमौरियों से छुटकारा दे हल्दी
आयुर्वेद में हल्दी का बहुत ही महत्व है। हल्दी में शक्तिशाली औषधीय गुण पाए जाते हैं जो कई तरह की बीमारियों को दूर करने के लिए कारगर है। यह एक करक्यूमिन प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी कम्पाउंड है जो सूजन को कम करने में सहायक है। अगर आप घमौरियों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपके लिए हल्दी एक आयुर्वेदिक उपाय है।
घमौरियों के लिए नमक, हल्दी और मेथी को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। नहाने से पहले इस उबटन को पूरे शरीर पर साबुन की तरह लगाएं और 5 मिनट बाद नहा लें। हल्दी में एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं। इससे घमौरियों की परेशानी से आराम मिलेगा।
बर्फ के टुकड़े
घमौरियों से राहत पाने के लिए बर्फ का टुकड़ा भी बहुत असरदार है। इसके लिए प्लास्टिक बैग या कपड़े में बर्फ के टुकड़े रखकर इन्हें घमौरियों पर लगाएं। ध्यान रहे बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं। इसे किसी कपड़े या प्लास्टिक में रखकर ही इस्तेमाल करें। 5 से 10 मिनट लगाए रखने के बाद इसे हटा लें। इसे आप दिन में कई बार दोहरा सकते हैं।
घमौरियों से निजात दिलाए एलोवेरा
हल्दी की तरह एलोवेरा का भी कई तरह के रोगों में एक आयुर्वेदिक उपचार के तौर पर उपयोग में लाया जाता है। रोगों के अलावा बालों और स्किन के लिए भी बहुत ही गुणकारी है। विटामिन सी, विटामिन ई और बीटा कैरोटीन से भरपूर एलोवेरा ड्राई स्किन की समस्या को दूर करता है और मुंहासे से निजात दिलाता है। एलोवेरा को हीलिंग पावर के लिए जाना जाता है। घमौरियों से उपचार चाहते हैं तो आप एलोवेरा का जेल या पल्प यानी गूदे को घमौरियों पर लगाएं। आपको जल्द ही आराम मिलेगा।
मुल्तानी मिट्टी
मुल्तानी मिट्टी अपने उत्कृष्ट एक्सफ़ोलीएटिंग गुणों के लिए जाना जाता है। यह तेल-अवशोषित गुणों के लिए बेहद लोकप्रिय है। यह न केवल मुंहासे से लड़ता है, बल्कि आपकी त्वचा को भी साफ करता है। इसका इस्तेमाल आप स्क्रब के रूप में कर सकते हैं जिससे आपको ब्लैकहेड्स से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी। यदि आप गर्मियों में होने वाली घमौरियों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो मुल्तानी मिट्टी बहुत असरदार है। मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल मिलाकर इस लेप को लगाने से घमौरियों में जल्द राहत मिलेगी।
घमौरियों का उपचार है चंदन
चंदन का पाउडर आयुर्वेद में बड़े पैमाने पर त्वचा के रोगों का इलाज करने के लिए एक समग्र तरीके से इस्तेमाल किया गया है। इसके कई स्वास्थ्य और सौंदर्य लाभ त्वचा पर चकत्ते, दाग, मुंहासे और कई अन्य त्वचा समस्याओं का इलाज कर सकते हैं। यह पिंपल का इलाज करने में सक्षम है। एंटी इंफ्लि मेंट्री गुणों से भरपूर चंदन की लकड़ी में ठंडक पहुंचाने वाले लाभ होते हैं।
घमौरियों की समस्या को दूर करने के लिए चंदन पाउडर और धनिया पाउडर को बराबर मात्रा मिलाकर इसमें गुलाब जल डालकर गाढ़ा लेप तैयार करें। इस लेप को शरीर पर लगाए और कुछ देर के लिए छोड़ दें। फिर इसे ठंडे पानी से धो लें। इससे घमौरियों की जलन की समस्या दूर होगी और त्वचा को ताजगी मिलेगी।
इस लकड़ी के बर्तन में पानी पीकर पाएं अर्थराइटिस और डायबिटीज से छुटकारा
विजयसार (वानस्पतिक नाम: Pterocarpus marsupium) मध्य ऊँचाई से लेकर अधिक ऊँचाई वाला वृक्ष है। यह एक पर्णपाती वृक्ष है जिसकी ऊँचाई 30 मीटर तक हो सकती है। यह भारत, नेपाल और श्रीलंका में पाया जाता है। भारत में यह पश्चिमी घाट और मध्य भारत के वनों में पैदा होता है। विजयसार की लकड़ी आपको किसी भी आयुर्वेदिक औषधि की दूकान में मिल जाएगी। इस लकड़ी का रंग हल्का या फिर गहरा लाल रंग का होता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों की मानें तो विजयसार की लकड़ी औषधीय गुणों का खजाना है। यह मधुमेह, धातुरोग और गठिया जैसे रोगों के लिए रामबाण है। जिन पहाड़ी क्षेत्रों में ये लकड़ी पाई जाती है वहां इस लकड़ी का ग्लास मिलता है, जिसमें पानी पीने से ही कर्इ तरह के रोग दूर हो जाते हैं।
इन रोगों में है लाभदायक
- जोडों के दर्द में लाभ देता है।
- अम्ल-पित्त में भी लाभ देता है।
- प्रमेह (धातु रोग) में भी अचूक है।
- हाथ-पैरों के कंपन्न में भी बहुत लाभदायक है।
- मधुमेह को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
- उच्च रक्त-चाप को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
- इसके नियमित सेवन से जोड़ों की कड़-कड़ बंद होती है अस्थियाँ मजबूत होती है।
- शरीर में बधी हुई चर्बी को कम करके, वजन और मोटापे को भी कम करने में सहायक है।
- त्वचा के कई रोगों, जैसे खाज-खुजली, बार-2 फोडे-फिंसी होते हों, उनमें भी लाभ देता है।
विजयसार के सेवन का तरीका
विजयसार की सूखी लकड़ी लेकर उनके
छोटे-छोटे टुकड़े कर दें। फिर आप एक मिट्टी का बर्तन ले और इस लकड़ी के
छोटे छोटे टुकड़े लगभग पच्चीस ग्राम रात को एक गिलास पानी में डाल दे। सुबह
तक पानी का रंग लाल गहरा हो जाएगा ये पानी आप खाली पेट छानकर पी लें और
दुबारा आप उसी लकड़ी को उतने ही पानी में डाल दे शाम को इस पानी को उबाल कर
छान ले। अगर आप इसका सेवन करना चाहते हैं तो किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ की
सलाह जरूर लें। अगर आप इसके साथ कोई एलोपैथी दवा ले रहे हैं तो सलाह लेना
बहुत जरूरी है। मार्केट में मिलने वाले विजसार की लकड़ी के ग्लास में भी
पानी रखकर पी सकते हैं।
इन रोगों में है लाभदायक
- जोडों के दर्द में लाभ देता है।
- अम्ल-पित्त में भी लाभ देता है।
- प्रमेह (धातु रोग) में भी अचूक है।
- हाथ-पैरों के कंपन्न में भी बहुत लाभदायक है।
- मधुमेह को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
- उच्च रक्त-चाप को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
- इसके नियमित सेवन से जोड़ों की कड़-कड़ बंद होती है अस्थियाँ मजबूत होती है।
- शरीर में बधी हुई चर्बी को कम करके, वजन और मोटापे को भी कम करने में सहायक है।
- त्वचा के कई रोगों, जैसे खाज-खुजली, बार-2 फोडे-फिंसी होते हों, उनमें भी लाभ देता है।
- अम्ल-पित्त में भी लाभ देता है।
- प्रमेह (धातु रोग) में भी अचूक है।
- हाथ-पैरों के कंपन्न में भी बहुत लाभदायक है।
- मधुमेह को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
- उच्च रक्त-चाप को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
- इसके नियमित सेवन से जोड़ों की कड़-कड़ बंद होती है अस्थियाँ मजबूत होती है।
- शरीर में बधी हुई चर्बी को कम करके, वजन और मोटापे को भी कम करने में सहायक है।
- त्वचा के कई रोगों, जैसे खाज-खुजली, बार-2 फोडे-फिंसी होते हों, उनमें भी लाभ देता है।
विजयसार के सेवन का तरीका
विजयसार की सूखी लकड़ी लेकर उनके
छोटे-छोटे टुकड़े कर दें। फिर आप एक मिट्टी का बर्तन ले और इस लकड़ी के
छोटे छोटे टुकड़े लगभग पच्चीस ग्राम रात को एक गिलास पानी में डाल दे। सुबह
तक पानी का रंग लाल गहरा हो जाएगा ये पानी आप खाली पेट छानकर पी लें और
दुबारा आप उसी लकड़ी को उतने ही पानी में डाल दे शाम को इस पानी को उबाल कर
छान ले। अगर आप इसका सेवन करना चाहते हैं तो किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ की
सलाह जरूर लें। अगर आप इसके साथ कोई एलोपैथी दवा ले रहे हैं तो सलाह लेना
बहुत जरूरी है। मार्केट में मिलने वाले विजसार की लकड़ी के ग्लास में भी
पानी रखकर पी सकते हैं।
आयुर्वेद
आयुर्वेद तन, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाकर स्वास्थ्य में सुधार करता है। आयुर्वेद में न केवल उपचार होता है बल्कि यह जीवन जीने का ऐसा तरीका सिखाता है, जिससे जीवन लंबा और खुशहाल होता है।
आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात, पित्त और कफ जैसे तीनों मूल तत्वों के संतुलन से कोई भी बीमारी आप तक नहीं आ सकती। लेकिन जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो बीमारी शरीर पर हावी होने लगती है और आयुर्वेद में इन्हीं तीनों तत्वों का संतुलन बनाया जाता है। साथ ही आयुर्वेद में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर बल दिया जाता है ताकि किसी भी प्रकार का रोग न हो।
घरेलू उपाय: ये है बूढ़ो को जवान बनाने वाली स्पेशल आयुर्वेदिक दवाई
लोग जवान बने रहने के लिए कई तरह के कॉस्मेटिक्स का उपयोग करते हैं। लेकिन कॉस्मेटिक्स त्वचा को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते हैं जिसके कारण समय से पहले ही अधिक उम्र दिखाई देने लगती है दरअसल उम्र पर असली असर खान-पान का पड़ता है कास्मेटिक्स का नहीं। इसीलिए हमेशा जवान बने रहने के लिए जवानी को फिर पाने के लिए या हमेशा जवान बने रहने के लिए आयुर्वेद में अनेक जड़ीबूटियों के नाम हैं जिनसे बुढ़ापा दूर रहता है।
- ऐन्द्री,
ब्राह्मी, आरकाकोली, क्षारपुष्पी, मण्डी, महामुण्डी, शतावरी, विदारीकंद,
जीवन्ती, पुनर्नवा, नागबला, शालपर्णी, वचा, छत्रा अतिछत्रा, मेदा, महामेदा
और जीवनीय द्रव्यों को दूध के साथ छ: महीने तक सेवन करने से उम्र लंबी होती
है और बुढ़ापे के रोग शरीर से दूर रहते हैं।
- वृद्धों को शक्ति वर्धक
चीजें जैसे बादाम किशमिश, सेब, अमरूद, केला, टमाटर लौंग, मुनक्का, आवंला,
संतरा, छुआरे, खजूर, अंजीर, अखरोट, घी, दूध, आदि का यथासंभव सेवन करना
चाहिए।
- ऐसा आहार करना चाहिए जो मीठा व रस युक्त हो। सुबह दूध, दिन
के खाने में दाल, चौकर युक्त रोटी, गाय के दूध से लें। रात में गाय के दूध
का सेवन करें।
- सुबह खाली पेट हरड़ खाएं। शाम को दूध जरुर पीएं।
रोजाना हरड़ लेते रहने से आंवले का प्रयोग करते रहने से, दूध घी लेते रहने
से, आंवले
का प्रयोग करते रहने से भी बुढ़ापा सताएगा नहीं और यौवन हमेशा बना रहेगा।
- रोजाना त्रिफला का सेवन मौसम अनुसार आयुर्वेदिक विधि से करें।
-
भृंगराजचूर्ण 1 भाग, आमल की चूर्ण आधा भाग, तिल आधा भाग, इन तीनों को
मिलाकर इनमें गुड़ मिलाकर इसका सेवन 10 से 12 ग्राम मात्रा में करें। इस
आयुर्वेदिक योग का सेवन बूढ़े को भी जवान बना देगा।
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