Tuesday, September 22, 2020

बावासीर/ पाईल्स/मुळव्याध

नागकेशर 25 ग्राम इलायची 5 ग्राम दोनों को साथ मिलाकर मिक्सर में बारीक़ करें और दिन में 4 बार मक्खन के साथ खाये... 4 दिनों में समस्या जड़ से ख़त्म हो जाएंगी. 

परहेज: केला, मसालेदार खाना, मटन, चिकन, फ़ास्टफूड ये कुछ चीजें  15 दिनों तक के लिये बंद करे.

Sahara Ayurvedic
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Monday, September 21, 2020

क्या होता है मधुमेह ?

मधुमेह एक ऐसी बीमारी हैं जिसमें रोगी के खून में ग्लूकोज़ की मात्रा (blood sugar level) आवश्यकता से अधिक हो जाती है.ऐसा  दो  वजहों  से  हो सकता है : या तो आपका शरीर पर्याप्त मात्रा में insulin नहीं produce कर रहा है या फिर आपके cells produce हो रही इंसुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं कर रहे. इंसुलिन एक हारमोन है जो आपके शरीर में carbohydrate और fat के metabolism को कण्ट्रोल करता है.मेटाबोलिज्म से अर्थ है उस प्रक्रिया से जिसमे शरीर खाने को पचाता है ताकि शरीर को उर्जा मिल सके और उसका विकास हो सके.

हम जो खाना खाते हैं वो पेट में जाकर energy में बदलता है जिसे glucose कहते हैं.  अब काम होता है इस energy/glucose को हमारे body में मौजूद लाखों cells के अन्दर पहुचाना, और ये काम तभी संभव है जब हमारे pancreas (अग्न्याशय) पर्याप्त मात्रा में insulin produce करें. बिना इंसुलिन के glucose cells में प्रवेश नहीं कर सकता. और तब हमारे cells ग्लूकोज़ को जला कर शरीर को उर्जा पहुंचाते हैं. जब यह प्रक्रिया सामान्य रूप से नहीं हो पाती तो व्यक्ति मधुमेह से ग्रस्त हो जाता है.

सामान्य स्वस्थ व्यक्ति में खाने के पहले blood में glucose का level  70 से 100 mg./dl रहता है। खाने के बाद यह level 120-140 mg/dl हो जाता है और फिर धीरे-धीरे कम होता चला जाता है। पर मधुमेह हो जाने पर यह level सामन्य नहीं हो पाता और extreme cases में 500 mg/dl से भी उपार चला जाता है.

Wednesday, May 13, 2020

पेट में गैस बनने की समस्या से छुटकारा पाने के घरेलु उपाय

नीम्बू और बेकिंग सोडा : एक गिलास गुनगुने पानी में एक नीम्बू निचोड़कर उसमें एक चुटकी बेकिंग सोडा मिला लें और इसे सुबह खाली पेट पीएं. ऐसा करने से पेट में गैस बनने की समस्या दूर होती है और एसिडिटी, बदहजमी, फूड पॉइजनिंग,कब्ज आदि बीमारी से भी छुटकारा मिलता है।

गुनगुने पानी और हींग : एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा-सा हींग मिलाकर दिन में 3 बार पीने से गैस की समस्या से जल्द आराम मिलता है. अगर हींग उपलब्ध न हो तो, केवल गुनगुने पानी पी सकते हैं, इससे भी गैस में राहत मिलती है।

छाछ और काला नमक : पेट में गैस बनने की प्रॉब्लम हो तो, छाछ में आवश्यकतानुसार काला नमक मिलाकर पीएं, ऐसा करने से यह बीमारी तुरंत समाप्त हो जाते हैं. यह समस्या होने की स्थिति में छाछ और काला नमक सबसे ज्यादा विश्वसनीय उपाय है।

खाने के बाद इलायची का सेवन : जब भी आप खाना खाते है तो उसके बाद जरूर इलायची ओर एक लौंग का सेवन करे, ये वस्तुएं आप के पेट मे खाना खाने के बाद एसिडिटी ओर गैस को बनने से रोक देती है।

अजवाइन के बीज : अजवाइन के बीजों में थाइमॉल नामक एक यौगिक होता है, जो पाचन में मदद करता है। अगर आप भी अक्सर गैस की समस्या से पीड़ित रहते है तो आप रोज खाने के बाद चुटकी भर अजवाइन खा लें। आप चाहे तो आप सुबह एक गिलास पानी में एक चम्मच अजवाइन डालकर खली पेट पी लें, इससे आपको बहुत फायदा होगा।

इस प्रकार अगर आपको भी पेट में गैस बनने की समस्या है तो हमारे द्वारा बताए गए इन उपायों को अपनाकर इससे जल्द आराम पा सकते हैं और स्वस्थ रह सकते हैं।

Sunday, September 22, 2019

केस गळतीची समस्या दूर

1) लसुन, कांदा अथवा आले यांचा रस काढून तो केसांच्या मुळांना लावावा. रात्री केसांना रस लावून सकाळी केस स्वच्छ धुवावेत. यामुळेही केस गळतीची समस्या दूर होते.

2) एक कप पाण्यात दोन बॅग ग्रीन टी मिसळून हे पाणी केसांच्या मुळांना लावावे. एका तासानंतर केस धुवावे. यामुळे केस गळती थांबून केस मजबूत होतात.

3) कांद्याचा रस लावा. अर्धा तासानंतर धुऊन टाका. यामुळे डोक्याची तब्येत चांगली होतील.

4) तुमचा खुराक चांगला असला पाहिजे. चांगले केस चांगल्या तब्येतीवर सजलेले दिसतात. प्रोट्रीनयुक्त अन्न खा. दूध, मासे, पनीर खा.

5) ओल्या केसांना रगडून पुसू नका. केस सुकल्यानंतर त्यावर कंगवा फिरवा.

6) तेल सामान्य तापमान किंवा गरम नसावे. कोमट असावे.

7) डोकं वर करून आणि पद्धतशीर चाला. घाम जास्त आला तर तो सुकण्याची वाट बघु नका ओल्या कपड्याने तो पुसून टाका.

8) जास्त गरम पाण्याने केस धुवू नये.

9) घट्ट वेणी किंवा अंबाडा बांघल्याने टाळूवर ताण येऊन केस नाजूक होऊ शकतात. केस ओले असतानाही घट्ट बांधू नयेत.
#सहारा_आयुर्वेदा
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Tuesday, June 25, 2019

शरिरावरिल तिळ, मस्से, चामखिळ, न दुखता , मुळापासुन काढण्याचा उपाय

जेव्हा तुमच्या चेहर्यावर किंवा शरिराच्या कोणत्याहि भागावर तिळ, मस, चामखिळ असतात, तर ते खूप वाईट दिसतं, आणि ते सौंदर्यात बाधा आणतं पण आपल्याला सर्जरि पण करायचि नसते. , तर मग आपण त्यांवर काहि घरगुति उपाय बघू या...

(१) रोज दिवसांतून २ वेळा. Vit..E..च्या तेलात आल्याचा रस मिसळून त्या जागि लावा. 1,2, आठवड्यांत गायब होतात..

(२) सुकलेले अंजिर याचा रस दिवसांतून  ४. वेळा त्या ठिकाणि लावा, आणि काहि वेळाने धूवचन टाका . यांतिल अँसिड सारखे घटक तिळ व मस निघून जाण्यास मदत करतात..आणि डाग पडत नाहि त्वचेवर.।

(३) मेथिचे दाणे रात्रभर पाण्यात भिजत ठेवा, सकाळि रिकाम्या पोटि प्या. तुमच्या समस्या दूर होतिल. आणी शरिर निरोगि राहिल..

(४) एरंडाचे तेलाचा वापर करून मस.चामखिळ जातात, तेलांत चिमुटभर बेकिंग सोडा टाकुन, त्या ठिकाणि लावा..२,३, आठवड्यातच चांगले परिणाम दिसतात..

(५) सफरचंद आणि व्हिनेगार एकत्रित करून कापसाच्या बोळाने त्या जागेवर लावा,  पंधरा मिनिटे तसेच ठेवछन मग धूवा.. मस, चामखिळ जातात.

Monday, June 24, 2019

नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है

  एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख  से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर  रात को नजर न के बराबर होने लगी।जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख  नहीं पायेंगे।.... मित्रो यह सम्भव नहीं है..

मित्रों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है...गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है।

गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है।

नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है

नाभी में देशी गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है।

1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय...
सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द देशी गाय का घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ ईंच  गोलाई में फैला देवें।

2. घुटने के दर्द में उपाय
सोने  से पहले तीन से सात बूंद अरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ ईंच में फैला देवें।

3. शरीर में कमपन्न तथा जोड़ोँ में दर्द और शुष्क त्वचा के लिए उपाय :-
रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें।

4. मुँह और गाल पर होने वाले पिम्पल के लिए उपाय:-
नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में उपरोक्त तरीके से डालें।

नाभी में तेल डालने का कारण
हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है।

जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।बस यही काम है तेल का।

अपने स्नेहीजनों, मित्रों और परिजनों में इस नाभी में तेल और घी डालने के उपयोग और फायदों को शेयर करिये।

सहारा आयुर्वेदा
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Wednesday, April 10, 2019

आयुर्वेदिक चिकित्सा... #पित्त

आयुर्वेदात वात, पित्त, कफ,  असे त्रिदोष आहेत, जे प्राक्रुत अवस्थेत  उपयोगि व शरिराचे धारण करणारे आहेत. तर विक्रुत झाले कि, हेच शरिरांतील इतर घटकांना बिघडवून आजार निर्माण करतात...

  ..पैकि ,, पित्त,, हे अन्नपचन प्रक्रियेतिल महत्वाचा घटक आहे. त्यामुळे त्याचे प्राक्रुत असणे गरजेचे आहे. हे ज्याप्रमाणे , पित्ताशयांत,, येते. तसेच आपण घेतलेल्या आहारातून ही  येतं. त्यामुळेच जरि पित्ताशय काढले तरि, त्याचे काम आमाशयांत चालूच राहते.

.. ज्याप्रमाणे ,,तुपाचा दिवा लावल्यानंतर तूप जळून त्यातून अग्नि तयार होतो. तसेच आपल्या शरिरात देखिल घेतलेला आहार जळतो. व त्यातूनच ,, अग्नि,, तयार होतो.. म्हणजेज  जठराग्नि म्हणूनच जेवणांत तिखट, तेलकट, पदार्थ खाल्ले कि, भूक वाढते.

म्हणजेच। ,,पित्त,, वाढते. आणि गोड खाल्ले कि, भूक शमते. व आपले पित्तही कमि होते. पण जास्त गोड खाल्ले कि भूक मंदावते. व ,अग्निमांद्य, होते. .. अर्थात तुम्हि जे खाता, आधि त्याचे पित्तात व पर्यायाने अग्नित रूपांतर होते.
    म्हणूनच पित्त वाढु द्यायचे नसेल तर, आहाराकडे लक्ष द्यावे.., अँटासिड, च्या गोळ्या जास्त खाउ नये. कारण तो तात्पुरता उपचार असतो..,, अश्यावेळि फक्त पित्त घट्ट होते आणि  त्याचेच खडे तयार होतात.

लक्षणेः।   छातित जळजळणे, मळमळ, उलटिचि भावना होणे,  जेवणानंतर करपट ढेकर येतात, डोके दुखते, त्वचा विकार होतात, खाज सुटते सर्वांगाला, चेहर्यावर पुरळ येतात. केस गळतात..

मग यावर काहि घरगुति  उपाय बघूः गुलकंद खावा, मनुके खडिसाखर, गाईचे तूप, हे सर्व आहारात असावे
   १  चमचा धने व १ चमचा जिरे कुटून एक ग्लास कोमट पाण्यात दहा मिनिटे भिजवुन , कुस्करून प्यावे.
  १/४ चमचा ज्येष्ठमध पावडर दूधातून, अथवा पाण्यातून तिन दिवस घेतल्याने पित्त कमि  होते.

  आयुर्वेदिक दुकानात ,,सूत शेखर, मात्रा मिळते हि उगाळून दूधातून घ्यावि. घरातले फ्रिजचे थंड दूध घ्यावे.
आवळ्याचे चूर्ण मधातून घ्यावे, ..पुदिना, काळि मिरे, मीठ, कोथिंबिर व भाजलेल्या जिर्याचे चूर्ण मिसळून हि चटणि कायम जेवणात ठेवा.

सहद, हिरडा मिसळून खावे, सुऔठ धने पावडर  २५ ग्रँम घेउन याच्या तिन खुराक बनवुन पाण्यात काढा करून प्या.  गुळवेल सत्व,  नारळ पाणि, मुगाचे कढण,  पडवळाचि भाजि, असा पथ्यकारक आहार घ्यावा.

कटाक्षाने टाळाः।  फूलकोबि, मसालेदार, चमचमित, बाहेरचे हाँटेलचे जेवण, नाश्ता, मिठाया, बटाटा, वांगे, मिरची,  आंबवलेले सर्व पदार्थ,  वर्ज करा..

आयुर्वेद उपचारात रोगी ७५% केवळ पथ्यानेच बरा होतो   २५% औषधाने.. हे मात्र महत्वाचे!!!..